Thursday, June 10, 2010

बकवास और उल जलूल थॉट्स

काफी लोगों को जब हमने किताबें, कवितायें और ब्लोंग लिखते हुए देखा तो हमारे अन्दर के लेखक को भी हमने झंकझोर कर उठाया। हमने कहा लेखक महाराज उठिए। सफ़ेद पन्नो की रात ख़तम हो गयी और सुन्दर, सुसज्जित ,सजे-धजे अक्षरों और कलात्मक मात्राओं वाली सुबह आने को है। कब तक सोते रहोगे? कहाँ तो कहते थे की हमे लिखने का शौक है और जब भी कोई अच्छी रचना, कविता या कहानी पढ़ते हैं तो लिखने की भावना बलवती हो उठती है और कहाँ अब ये हाल है की एक पन्ना भी क्रियेटिव थॉट अपने दिमाग के पिटारे से निकालके कागज़ काले नहीं किये हैं? क्या लाइफ भर सिर्फ नदी के किनारे बैठके, पानी में पैर डालके छप छप ही करते रहोगे? या अपनी कश्ती को बहाव में भी उतारोगे? अब वक़्त आ गया है कुछ करने का?

1 comment:

mastkalandr said...

बहुत सही ..सबको समय के साथ चलना होगा और खुद को समय के अनुकूल ढालना होगा ..मक्

http://www.youtube.com/mastkalandr